आज 1 दिसंबर यानी ‘वर्ल्ड एड्स डे’ है. इस दिन को हर साल एड्स के प्रति जागरूकता फ़ैलाने के लिए मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का प्रचलन 1988 से शुरू किया गया था. एड्स ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी (एचआईवी) वायरस के संक्रमण के कारण होने वाला महामारी का रोग है, जो पूरी दुनिया में तेजी से फैलता जा रहा है. यूनाइटेड नेशंस की की रिपोर्टस् के मुताबिक, 1988 के बाद से अब तक दुनिया में करीब ढाई करोड़ लोग एड्स से मारे जा चुके हैं. और करोड़ों की तादाद में लोग इसकी चपेट में हैं.

एड्स से ग्रसित सबसे ज़्यादा मामले साउथ अफ्रीका में पाए गए हैं. यानी के यहाँ एड्स रोगी सबसे ज्यादा हैं. एक अनोखी परंपरा भी एड्स का यहाँ फ़ैलने का एक मुख्य कारण है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीकी देशों में सेक्शुअल क्लिन्जिंग का प्रचलन है. मलावी में ये परंपरा ‘सेक्शुअल क्लिन्जिंग’ यानी यौन पवित्रीकरण के नाम से जानी जाती है. यहां पुरुष हायन की भूमिका में होता है. इन पुरुषों को विधवा महिलाओं और शादी के लिए तैयार लड़कियों के साथ संबंध बनाने के लिए हायर किया जाता है.

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इतना ही नहीं, लड़की के माता-पिता खुद इन्हें बुलाते हैं और बेटी के साथ संबंध बनाने के लिए इन्हें बकायदा फीस भी देते है. इस प्रैक्टिस के तहत लड़कियों को अनजान मर्दों के साथ सम्बन्ध बनाने पड़ते हैं. लड़कियों के पहले मेन्सुरेशन के बाद ये परंपरा निभाई जाती है. इस परम्परा की वजह से, एड्स इस देश में भयानक रूप ले चुकी है. आपको बता दें, की यहाँ की सरकार ने इस परमपरा को गैर कानूनी घोषित कर रखा है. इसके बावजूद ये देश कई रिमोट इलाकों में अब भी जारी है.