स्मिता पाटिल की छोटी सी जिन्दगी में आये थे कई मोड़, जन्मदिन पर विशेष

फिल्म जगत में कई ऐसे नाम हैं जिसने बहुत कम समय तक काम किया पर उसके काम को आज भी सराहा जाता है। ऐसा ही एक नाम है मशहूर अभिनेत्री स्मिता पाटिल का। आज स्मिता पाटिल की 63 वीं जन्मतिथि है। भले ही स्मिता ने बहुत कम समय के लिए अभिनय की दुनिया में रही पर जितना भी काम किया वो लाजबाब था और उनके इन्ही काम ने फिल्म जगत में उनकी एक अलग छवि बनाई।

स्मिता पाटिल ने फिल्म ‘चरणदास चोर’ से साल 1975 में अपना फिल्म कैरियर शुरू किया था। साकारत्मक सिनेमा में उस दौर में शबाना आज़मी के साथ स्मिता पाटिल की तूती बोलती थी। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया। महेश भट्ट की फिल्म अर्थ में दोनों साथ थीं। बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड तो शबाना ने जीता मगर दिल स्मिता जीत गईं। महज 31 साल की आयु में स्मिता पाटिल का निधन हो गया था। मृत्य के बाद उनकी कुल 14 फ़िल्में रिलीज हुईं थी।

लोग स्मिता को सिर्फ आर्ट फिल्मो का स्टार समझते थे। निर्देशक श्याम बेनेगल की वो पसंदीदा हीरोइन हुआ करती थी। लेकिन स्मिता ने जब मसाला फिल्मो में हाथ आजमाएं तो वहां भी झंडे गाड़े। अमिताभ बच्चन के साथ नमक हलाल और शक्ति इसका प्रमाण है। नमक हलाल में आज रपट जाएँ पर बारिश में कामुक डांस करती स्मिता को कौन भूल सकता है।

‘गलियों का बादशाह’ उनकी आखिरी फ़िल्म थी। फिल्मों में बोल्ड सीन देने में संकोच ना करने वाली स्मिता पाटिल असल जिंदगी में बेहद ही शांत महिला थीं। एक दशक से छोटे फ़िल्मी सफ़र में स्मिता पाटिल ने अस्सी से ज्यादा हिंदी और मराठी फ़िल्मों में अपने उम्दा अभिनय का प्रदर्शन कर कई कीर्तिमान रचे। उनकी कुछ बहुचर्चित फ़िल्में थीं – ‘निशान्त’, ‘चक्र’, ‘मंथन’, ‘भूमिका’, ‘गमन’, ‘आक्रोश’, ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’, ‘अर्थ’, ‘बाज़ार’, ‘मंडी’, ‘मिर्च मसाला’, ‘अर्धसत्य’, ‘शक्ति’, ‘नमक हलाल’, ‘अनोखा रिश्ता’ आदि।

स्मिता पाटिल की निजी जिन्दगी की बात करें तो बेहतरीन फिल्मो के कारण उनकी बढ़ती प्रसिद्धि के साथ-साथ कई प्रकार के विवादों के कारण भी वे चर्चा में रहती थी। स्मिता पाटिल के ऊपर राज बब्बर का घर तोड़ने का भी आरोप लगाया जाता रहा है। बता दें कि जब फिल्मों में साथ साथ काम करते हुए राज बब्बर के संग उनकी करीबी कुछ अधिक बढ़ने लगी तब मीडिया में उनकी आलोचना शुरू हो गई थी और उन्हें दूसरी औरत होने का तोहमत झेलना पड़ा था क्योंकि राज पहले से शादीसुदा थे और उस वक़्त एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को लोग बहुत बुरा मानते थे। ज्यादातर लोगों को उस वक़्त राज की पत्नी नादिरा से सहानुभूति थी और स्मिता को काफी भला-बुरा कहा जाता था।

साल 1982 में राज बब्बर ने अभिनेत्री स्मिता पाटिल के साथ में पहली बार फिल्म भीगी पलकें में काम किया था। इस फिल्म के दौरान ही दोनों के बीच करीबी बढ़ी थीं। स्मिता से शादी करने के लिए राज ने अपना घर और पहली पत्नी को छोड़ दिया था। राज बब्बर से शादी करने के बाद राज और स्मिता का एक बेटा प्रतीक बब्बर हुआ।

बाद में स्मिता को वायरल इन्फेक्शन की वजह से ब्रेन इन्फेक्शन हुआ था जिसकी वज़ह से उन्हें अक्सर हॉस्पिटल जाना पड़ता था पर स्मिता हॉस्पिटल जाने के लिए बहुत जल्दी तैयार नहीं होतीं थीं। स्मिता अपने बेटे प्रतीक से बहुत प्यार करती थीं जिसकी वजह से वे उसे अकेला छोड़ कर अस्पताल जाने के लिए तैयार नहीं होतीं थीं, पर जब उनका इन्फेक्शन बहुतज्यादा बढ़ गया तो उन्हें जसलोक हॉस्पिटल में भर्ती करवा या गया। स्मिता के शरीर के अंग एक के बाद एक फेल होते चले गए। बताया जाता है की स्मिता अपने आखिरी दिनों में बहुत अकेला महसूस करतीं थीं। उस वक़्त राजबब्बर और उनके रिश्ते में भी काफी दूरियां आ गईं थीं।