रावण के आश्चर्यजनक अनसुने किस्से जो आपने कहीं नहीं सुने होंगे

नमस्कार दोस्तों, आप सभी का स्वागत है। रामायण हिंदू धर्म की सबसे पावन कथा है इसमें श्री राम को सच्चाई का प्रतीक और रावण को बुराई का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इसके बावजूद इस बात से कोई इंकार नहीं करता कि रावण एक महा ज्ञानी था। जितना ज्ञान रावण के पास था वैसा ना पहले कभी किसी के पास हुआ और ना ही बाद में कभी हुआ। वैसे तो रावण की ज्यादातर बातें आपने सुनी ही होगी लेकिन फिर भी आज हम आपको बताने वाले हैं रावण के बारे में कुछ अनसुनी बातें जो शायद ही आप जानते हों, आइये जानते है।

 रावण बहुत ही ज्ञानी था और उसने लंका को बहुत ही विकसित किया था। एक बार तो रावण ने हिमालय में जाकर कैलाश पर्वत को ही उखाड़ने की कोशिश की तब भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से रावण को दबा दिया था । तब रावण दर्द से चिल्लाने लगा और भगवान शिव से माफी मांगने लगा। भगवान शिव ने रावण को माफ किया और तभी से रावण सबसे बड़ा शिव भक्त बन गया।

 रावण के 10 सर माने जाते हैं और इसके पीछे कथा है कि रावण ने कितनी शिव भक्ति की रावण के 10 सर माने जाते हैं। एक बार भक्ति में लीन रावण ने अपने ही शेर को 10 भागों में बांट दिया लेकिन भक्ति की शक्ति के कारण ही रावण के सर का हर एक हिंसा एक सम्पूर्ण सर बन गया।

रावण इतना बड़ा ज्ञानी था इसलिए उसे अपनी नियति भी पता थी। रावण को इस बात का ज्ञान पहले ही हो गया था कि विष्णु अवतार के हाथों उसकी मृत्यु होगी और उसके बाद उसको मोक्ष की प्राप्ति होगी। रावण को इस बात का ज्ञान भी पहले हो गया था कि हम नियति को टाल नहीं सकते चाहे हम उसे जितना भी भागने की कोशिश करें। वह हमें उसी जगह पर लाकर खड़ा कर देगी जिसके लिए हम बने हैं।

जब रावण की बेटी मेघनाथ का जन्म होने वाला था तब रावण ने सभी ग्रहों को एक ही जगह आने को कहा था। सब आ गए लेकिन शनिदेव नहीं आए इसीलिए रावण ने शनि देव से बदला लिया और अपना कैदी बना लिया।अगर तब सारे गृह एक साथ आ जाते तो मेघनाथ अमर हो जाता।

जब रावण अपनी आखिरी सांसे ले रहा था तब श्री राम ने लक्ष्मण को रावण के पास जाकर ज्ञान लेने को कहा। इस तरह आखरी क्षण में लक्ष्मण ने रावण से वह ज्ञान दिया जो रावण ने अपने पूरे जीवन काल में अर्जित किया था आपको शायद यह पता न हो रावण ब्रह्मा का परपोता था दरसल रावण के पिता विश्रवा थे जोकि प्रजापति ब्रह्मा के दस पुत्रो में एक थे।

रावण ने अपने ज्ञान और ध्यान से खुद को इतना शक्तिशाली कर लिया था की वह देवताओं को भी हरा सकता था। रावण की नियति ही उसके घमंड से उसका विनाश तय कर चुकी थी। नहीं तो महाज्ञानी रावण की शक्ति असीम हो जाती। लेकिन रावण अपनी नियति का ज्ञान भी पा चुका था की वह भी श्री राम नाम के साथ ही अपना नाम भी अमर कर लेगा।