आखिर SC/ST एक्ट से सवर्ण वर्ग के लोग इतना क्यों डर रहे हैं, जानिये क्या है हकीकत

नमस्कार दोस्तों, सुप्रीमकोर्ट द्वारा जब से SC/ST एक्ट को कमजोर किया गया था। उस समय सरकार ने भी अपने आंकड़ों में बताया था कि SC/ST पर अपराधा की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी थी। अब सबाल इस बात का उठता है कि सवर्णों का यह प्रदर्शन क्या साबित करना चाहता है। इस भारत बंद से तो यही सबालिया निशान उठते हैं कि अब सवर्ण वर्ग के लोग दबे कुचले लोगों को परेशान नहीं कर सकेगें ,उनको बेबजाह नहीं पीट सकेगें। आज मैं आपको ऐसे सैकड़ों उदाहरण बता सकता हूँ जिसमे SC/ST को बिना अपराध के पीट पीट कर मार दिया गया। अब सवर्ण इन लोगों को परेशान नहीं कर पायेंगे ये सबसे बड़ा दुःख है और यही मूल कारण आज भारत बंद का है। सच्चाई तो यही है SC/ST के पास एक अस्त्र है और उसे भी ख़त्म कर दिया जाय तो आसानी से इन लोगों पर अत्याचार कर सकें। आखिर इसके अलाबा और कौन सी सवर्णों को परेशानी है। इस मुख्य वजह से सवर्ण वर्ग के लोग डर रहे हैं कि अब एस सी और एस टी पर अत्याचार नहीं कर पायेंगे।

क्या है SC/ST एक्ट

अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोगों पर होने वाले अत्याचार और उनके साथ होनेवाले भेदभाव को रोकने के मकसद से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम, 1989 बनाया गया था। जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में इस एक्ट को लागू किया गया। इसके तहत इन लोगों को समाज में एक समान दर्जा दिलाने के लिए कई प्रावधान किए गए और इनकी हरसंभव मदद के लिए जरूरी उपाय किए गए। इन पर होनेवाले अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था की गई ताकि ये अपनी बात खुलकर रख सके। हाल ही में एससी-एसटी एक्ट को लेकर उबाल उस वक्त सामने आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के प्रावधान में बदलाव कर इसमें कथित तौर पर कमजोर बनाना चाहा।

संशोधन के बाद अब ऐसा होगा SC/ST एक्ट

एससी\एसटी संशोधन विधेयक 2018 के जरिए मूल कानून में धारा 18A जोड़ी जाएगी। इसके जरिए पुराने कानून को बहाल कर दिया जाएगा। इस तरीके से सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए प्रावधान रद्द हो जाएंगे। मामले में केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी का प्रावधान है। इसके अलावा आरोपी को अग्रिम जमानत भी नहीं मिल सकेगी। आरोपी को हाईकोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकेगी। मामले में जांच इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अफसर करेंगे। जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज होगा। एससी/एसटी मामलों की सुनवाई सिर्फ स्पेशल कोर्ट में होगी। सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर करने से पहले जांच एजेंसी को अथॉरिटी से इजाजत नहीं लेनी होगी।

अब सोंचने की बात यह है कि यदि किसी कमजोर व्यक्ति को लाठी का सहारा दिया जाय तो क्या गलत गलत है। संविधान में सभी के लिए समानता का अधिकार कर किन्तु क्या आज 58 साल बाद भी समानता मिली आज भी वही हो रहा है जो 58 साल पहले हो रहा है। सवर्ण वर्ग के लोग अपना पूर्ण से SC/ST को गुलाम बनाकर नहीं रख सकेंगे। यही सबसे बड़ा डर है बाकि इस भारत बंद का कोई मतलब ही नहीं बनता है।