आज नॉएडा के बहुचर्चित आरुषि हत्याकांड का फैसला हाई कोर्ट में सुनाया गया. इस दोहरे हत्याकांड में उम्र कैद की सजा भुगत रहे आरुषि के माता-पिता तलवार दम्पति, नूपुर तलवार और राजेश तलवार, को हाई कोर्ट ने आज बरी कर दिया. हर कोई #ArushiVerdict के बारे में बात कर रहा है जैसे हेमराज तो इंसान था ही नहीं. क्या किसी को यद् है भी कनहीं की 14 साल की आरुषि के साथ नौकर हेमराज का भी क़त्ल किया गया था. तलवार दुमति तो सुर्ख़ियों में है ही पर हेमराज से जुड़े लोग यानि उसके घरवालों के बारे में कोई बात क्यों नहीं कर रहा?

आखिर क्या था मामला?

16 मई 2008 को आरुषि अपने कमरे में मृत पायी गयी. गला कटा हुआ था और चरों और खून ही खून था. आरुषि के माता-पिता ही थे जिन्होंने उसे सबसे पहले इस हालत में देखा. उन्होंने पुलिस में कंप्लेंट दर्ज कराई जिसमें नौकर हेमराज क़त्ल का ज़िम्मेदार ठहराया गया. पर अगले ही दिन कहानी में नया मोड़ तब आया जब नौकर की हेमराज की आधी सड़ी लाश टेरेस से बरामद हुई. आरुषि की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में आया की उसके साथ मारने से पहले सेक्सुअल असाल्ट किया गया है. जिस तरह से क़त्ल किये गए थे पुलिस को लगा की ये काम अनादर के ही आदमी का है. शक के बिनाह पर तलवार दम्पति को अरेस्ट कर लिया गया.

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जो हुआ बहुत बुरा हुआ. पर इस केस का एक कटु सत्य यह भी है की जितनी सहानुभूति मीडिया और देश के लोगों ने आरुषि के मर्डर पर दिखाई वही हेमराज के क़त्ल को उतना तूल नहीं दिया गया. आखिर कौन था वो बेचारा नौकर? हेमराज धरापनी गाँव का निवासी था जो नेपाल की राजधानी काठमांडू से 400 km की दूरी पर स्तिथ है. हेमराज के गाँव क लोगों का जेहन है की वो एक सिंपल सा इंसान था और वो कल्पना भी नहीं कर सकते की उसने बेटी सामान आरुषि के साथ कोई घिनोना काम किया होगा.

हेमराज का परिवार

हेमराज की 46 वर्षीया बीवी खुमकला आज भी पति के न होने का दर्द नहीं भूली है. वह गरीब है. हेमराज ही तो आय का सहारा था वो भी चला गया. उसे आर्थराइटिस है. पति के गुज़र जाने के बाद हालात बदतर हो गए हैं. उसे अपना भविष्य अंधकारमय दिखाई देता है. उसे इन्साफ चाहिए. वह चाहती है की तलवार दम्पति को उम्रकैद नहीं बल्कि फांसी हो. खुमकला बताती है की हेमराज हर महीने 3000 रुपये भेजा करता था जिसे हम अपना गुज़ारा करते थे. हेमराज की मौत के बाद उन्हें आर्थिक कठिनाईओं से दिन रात जूझना पड़ रहा है. खुमकला कहती है, “हमारे पास ज़मीन का एक बहुत ही छोटा टुकड़ा है जो की पेट पलने क लिए काफी नहीं है. इससे बस दो महीने तक की फसल ही इकठा की जा सकती है. मई अपने माता-पिता पर निर्भर हूँ.”

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हेमराज की मौत से उसके टीनएजर बेटे प्रज्वल की ज़िन्दगी भी आहत हुई है. और न सिर्फ बेटे की बल्कि 78 साल की बूढी माँ कृषणकला की भी. कृष्णकला कहती हैं की, “मैं एक छोटी सी शाला बनाना चाहती थी जिसमें मैं एक भैंस रख के उसके दूध को बेचकर घर का खर्च निकालती. हेमराज कुछ पैसे भेजता था. पर अब हम असहाय हैं.” प्रज्वल बस 12 साल का था जब उसने अपने पीता हेमराज को खो दिया. उसे अस्थमा भी है. और वो अपने भविष्य को लेकर चिंतित है. प्रज्वल कहता है,
“मुझे नहीं पता की मई स्कूल ख़तम होने के बाद क्या करूँगा. देखते है भविष्य अपनी गॉड में क्या छुपाकर बैठा है.”

मान लेते हैं हेमराज और आरुषि के कातिलों को सज़ा हो भी जाएगी. पर हेमराज से जुड़े इन तीन लोगों का क्या जो पूरी तरह से आर्थिक तौर पर हेमराज पर निर्भर थे? कोई कसूर किये बिना ये लोग वो सज़ा भुगत रहे हैं जो कभी इनके हिस्से की थी ही नहीं.

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